Hemant – UPSC 2023 AIR-884 Motivational Journey From MGNREGA to UPSC Bhawan
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DecodeCIVILS – Mudit Jain
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मेरा नाम हेमंत है मेरा जन्म गांव वीरान तहसील भादरा जिला हनुमानगढ़ राजस्थान में एक मजदूर परिवार में हुआ है मेरी माता जी मनरेगा में दिहाड़ी करते हैं और मेरे पिताजी थोड़ा बहुत कर्मकांड का कार्य करते हैं|
मैंने अपनी 10th तक की पढ़ाई महर्षि दयानंद स्कूल से हिंदी माध्यम से की है वहां पर केवल एक अध्यापक थे मुझे दसवीं कक्षा में 60% अर्जित हुए| उसके बाद 12th मैंने आर्य समाज स्कूल छानी बड़ी से एग्रीकल्चर में हिंदी माध्यम से की है और मुझे 70% अर्जित हुए|
इसके बाद मैंने JET की परीक्षा दी और उसमे मैं fail हो गया फिर मैंने अगले वर्ष फिर से JET की परीक्षा दी और और मैं उत्तीर्ण हो गया लेकिन मेरे पास शुरुआती फीस के पैसे नहीं थे इसलिए मुझे वह सीट छोड़ना पड़ा| फिर मुझे किसी ने कहा की JBT का डिप्लोमा कर ले उस टीचर लग जाएगा फिर मैंने JBT में एडमिशन ले लिया और प्रथम वर्ष मुझे अंग्रेजी में फेल कर दिया|
फिर अगले वर्ष फिर मुझे मेरी दोस्त कोमल और पंकज ने कहा कि तुम ICAR का form fill कर दो क्या पता तुम्हारा selection हो जाए और साथ में JBT 2nd year की परीक्षा दे देना|
Ethics Topic Wise PYQs
फिर आईसीएआर की परीक्षा हुई और मेरा एग्जाम अच्छा नहीं हुआ फिर भगवान ने साथ दिया और परीक्षा रद्द कर दी गई उसके पश्चात परीक्षा का पुनः आयोजन 3 महीने बाद किया गया| इसी दौरान मुझे जो English में fail किया गया था उसे पर मैंने विचार किया और घरवालों से घर वालों से टीचर की तैयारी के नाम पर नाम पर झूठ बोलकर पैसे मांगे और english सीखना शुरू कर दिया और तीन से चार महीने में English को अच्छा कर लिया|
इसके बाद इसके बाद ICAR की परीक्षा पुनः आयोजित की गई और भगवान की कृपा से मेरे माता-पिता के आशीर्वाद से मेरी दादी मां के आशीर्वाद से मुझे श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर जयपुर में दाखिला मिल गया वहां से मैं अपना ग्रेजुएशन एग्रीकल्चर में शुरू किया|
यहां से मैंने अपना माध्यम हिंदी से English कर लिया| यहीं से ही एक किस्सा शुरू होता है कि मैं घर पर था और मेरी माता जी हैं वह मेरे गले लगा कर रोने लग गए तब मैंने पूछा कि क्या हुआ म रो क्यों रहे हो तो उन्होंने कहा कि बेटा पीछे से सरकार हमारे ₹200 देती है 220 रुपए देती है और यहां पर हम दिन भर मजदूरी करते हैं और हमें 50_60_70 ये रुपए मिलते हैं और इस बार तो मैं अपनी ड्यूटी पानी के लिए लगवाई थी जिसके मुझे ₹20 ज्यादा मिलने थे लेकिन अब भी मुझे 60_70 RS मिले हैं तो मुझे यह बात बुरी लगी और मैं कार्यालय पहुंच गया वहां पर कुछ देर तो उन्होंने समझाया कि यह करना पड़ता है जनसंख्या ज्यादा है| इस तरह से फिर जब मैं उन्हें कहा कि एक बार आप मुझे रिकॉर्ड दिखा दीजिए तभी उनमें से एक ने कहा की ज्यादा कलेक्टर मत बन हम पर और सच बताऊं तो मुझे पता भी नहीं था कि कलेक्टर और कंडक्टर में क्या फर्क होता है और वहां से फिर मैं मायूस होकर घर लौट आया|
Hemant’s Scores: GS _ 424, Essay 122 and Mains 792 You can contact him on Instagram and Telegram
उसके बाद मैं फिर कॉलेज गया वहां पर एक दिन रैगिंग चल रही थी और सीनियर सभी से पूछ रहे थे कि किसको क्या बना है लाइफ में क्या करना है तभी सब साथ वाले कोई बोल रहा था कि मैं एग्रीकल्चर सुपरवाइजर की तैयारी करूंगा कोई बोला प्राइवेट कंपनी जॉइन करूंगा| तभी जब मेरी बारी आई तब मुझसे उन्होंने पुछा की आपको लाइफ में क्या बना है तो मैं मुझे कुछ आईडिया नहीं था कि मुझे क्या बनना है तब मैंने सर से कहा कि मुझे पता नहीं है कि आगे कहां जा सकते हैं तो आप मेरा मार्गदर्शन कर दीजिए तभी उन्होंने टॉन्ट मारा और कहा IAS बन जाएगा और मैंने कहा हां सर मैं बन जाऊंगा मुझे बता दीजिए इसके कितने एग्जाम होते हैं और क्या पढ़ना पड़ता है। उसके बाद वहां पर मौजूद सभी सीनियर और मेरे क्लासमेट मुझ पर हंसने लग गये|
फिर मैं मेरे रूम पर आया और मैंने मेरे भैया को फोन किया और पूछा की भैया यह IAS क्या होता है मुझे IAS बनना है फिर उन्होंने समझाया कि कोई और नोकरी की तैयारी कर लो पर मैंने कहा कि नहीं भैया मुझे IAS ही बनना है तब फिर उन्होंने मुझे कुछ यूट्यूब चैनल भेजें फिर मैंने भी यूट्यूब पर सर्च किया फिर पता लगा कि IAS से कलेक्टर बनते हैं और फिर वह उनकी बात याद आ गई जब मैं मेरी माता जी के लिए मै न्याय मांगने गया था ओर उन्होने ताना दिया था कि तू ज्यादा कलेक्टर मत बन| फिर उसी दिन मैंने ठान लिया की एक दिन में कलेक्टर ही बनूंगा|
उसके बाद जो उन्होंने मुझे ताना मारा था कि कलेक्टर मत बन और जो सीनियर ने मुझे ताना मारा था वह दोनों चीजे मैंने अपनी स्टडी टेबल पर चिपका दी और साथ में अपनी मां ओर दादी मां की फोटो भी लगा ली|
उसी दिन के बाद में UPSC-IAS की तैयारी में लग गया और फिर मुझे समय-समय पर बहुत अच्छा मार्गदर्शन मिलता रहा कॉलेज में शुरुआती दिनों में सोनू जैन सर उसके पश्चात IPS गौरव पांडे सर, IAS विजयवर्धन सर, नरेश जी राजेरा सर, निशात सर LEVEL UP IAS, रजत सैनी सर, अरविंद वशिष्ठ सर, नितिन सर, दिव्यांशी लेहरी जी , हिमांशु सर, जोगेंद्र सिहाग, रिशांक, मनजोत सचदेवा और अन्य दोस्तो का पूरा सहयोग मिला|
Challenges faced by Hemant – UPSC 2023 AIR-884
सबसे पहले मेरी माता जी मनरेगा में काम करते हैं तो आर्थिक समस्या जो है उसने सबसे ज्यादा परेशान किया है| मुझे आज भी वह दिन याद है जब JET का एग्जाम पास होने के बावजूद मुझे सीट छोड़ना पड़ा क्योंकि मेरे पास एडमिशन फीस के पैसे नहीं थे| उसके बाद 4 साल तक जयपुर कॉलेज में SURVIVE करना सबसे बड़ा चैलेंज था क्योंकि आर्थिक रूप से मैं समृद्ध नहीं था और मेरी स्कॉलरशिप भी नहीं आ रही थी| मुझे आज भी याद है जब 1st year के 2nd sem में कॉलेज छोड़ने पर मजबूर हो गया था तभी मुझे समाज के लोगों ने सहायता प्रदान की और मेरी 2 वर्ष की फीस उन्होंने भर दी| उसके बाद 3rd year ओर 4th year में मेरे SENIORS ओर दोस्तों ने फीस भर दी|
अब जो मुझे समस्या आई वह यह थी कि कॉलेज की पढ़ाई के बाद घर जाऊं या कोई 10000- 15000 की नोकरी करूं या दिल्ली अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तैयारी करू| तब मैंने अपने सारे इकट्ठे किए हुए पैसे देखें तो मेरे पास 1400 रुपए थे फिर मैं अपने पापा को फोन किया और कहा पापा मुझे IAS बनना है और उन्हें इसका पता भी नहीं था कि यह क्या होता है|
उन्होंने कहा बेटा बन जा फिर| मैंने कहा पापा इसके लिए लाखों रुपए फीस लगती है और दिल्ली में रहना पड़ता है तभी उन्होंने कहा की बेटा हमारे पास घर है हम इसको बेच देंगे लेकिन तू दिल्ली जा और मन लगाकर पढ़ाई कर तभी मैंने मन में सोचा और खुद से कहा कि नहीं घर तो नहीं बिकने दूंगा| फिर मैं अपने ₹1400 लेकर जयपुर से दिल्ली की बस में रवाना हो गया और फिर मेरे एक अजीज मित्र जोगेंद्र सियाग जो उसे समय दिल्ली में रहते थे उनको फोन किया और कहा मैं दिल्ली आ रहा हूं कुछ समय के लिए आपके पास रुकना है उन्होंने कहा आपको जितना समय रुकना है आप रुकिए और अच्छे से मन लगाकर पढ़ाई कीजिए|
फिर मैं जोगिंदर सियाग के पास पहुंचा और जब तक मैं उसके पास पहुंच जा मेरे पास केवल 240 रुपए बचे थे फिर मैंने एक दो लाइब्रेरी में काम देखा तभी मेरी मुलाकात एक अनजान व्यक्ति से हुई और उसने मुझे श्री मांगीलाल जी पारीक, श्री राजकुमार जी पारीक, और श्री अविनाश जी पारीक के बारे में बताया|
फिर मैं उनका पता लिया और उनसे मिलने सीधा उनके घर पहुंच गया मैंने उनसे कहा कि मैं IAS की तैयारी कर रहा हूं और मुझे दिल्ली में एक से डेढ़ वर्ष तक रुकना है आप इसमें मेरी सहायता कर दीजिए मैं आपके सारे पैसे पास होने के बाद लौटा दूंगा। उन्होंने कहा ठीक है भरोसा कर कर देखते हैं आपको पैसे वापस लौटने की कोई आवश्यकता नहीं है| उसके बाद उन्होंने पटेल नगर में मेरे रहने की मेरे खाने की व्यवस्था कर दी और वहीं से मेरी तैयारी में एक नया मोड़ ले लिया|
फिर मुझे समस्या आई कि मैं कोचिंग कैसे करूं तभी मैं इधर-उधर कोचिंग में गया मैं अपनी समस्या बताई लेकिन किसी में हेल्प सहायता नहीं की उसके बाद मेरी मुलाकात श्री NISHAT SINGH जी सर (LEVEL UP IAS ) से हुई और मैंने उनको अपनी स्थिति बताई और कहा कि मुझे सोशियोलॉजी की पढ़ाई करनी है और अभी मेरे पास फीस के पैसे नहीं है मैं परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद आपकी फीस लौटा दूंगा और भगवान जाने ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे बिना फीस के कक्षा में एडमिशन दे दिया|
उसके बाद प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आया और भगवान की कृपा मेरे माता-पिता मेरी दादी मां मेरे गुरुजनों सब के आशीर्वाद से मेरा लिस्ट में नाम आ गया| उसके बाद सबसे बड़ी समस्या थी की मुख्य परीक्षा की तैयारी कैसे की जाए तभी मुझे आज भी याद है कि मैं चाय की दुकान पर चाय पी रहा था और बहुत उदास था| तभी मेरी मुलाकात एक सज्जन श्री रजत जी सैनी सर से हुई और उन्होंने मेरे परेशानी का कारण पूछा तभी मैंने कहा सर मैं प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया हूं लेकिन मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए मेरे पास पैसे नहीं है तब उन्होंने कहा कि इसकी तैयारी के लिए पैसे नहीं हौसले की जरूरत होती है और मैं UPSC के दो साक्षात्कार दिए हैं इसलिए थोड़ा मैं आपको समझाने का प्रयत्न करता हूं| तभी उन्होंने मुझे यह समझाया कि मुख्य परीक्षा को किस तरह से तैयार करना है| मुझे उनके समझने का तरीका बहुत अच्छा लगा फिर मैं उनसे प्रार्थना की की सर में आप जितना बोलोगे उतनी मेहनत कर लूंगा बस आप 3 महीने मेरा साथ दे दीजिए और भगवान जाने कैसे उन्होंने भी मुझ पर भरोसा किया और 3 महीने तक मेरे साथ रुके और मुझे पढाया फिर जैसे ही मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आया मेरा नाम उस लिस्ट में था|
मेरा मुख्य परीक्षा का माध्यम ENGLISH था| उसके बाद फिर साक्षात्कार की तैयारी में मैं लग गया इस दौरान मेरी मुलाकात एक और सज्जन श्री अरविंद जी वशिष्ठ, दिव्यांशी जी लहरी, पुनीत जी, नितिन जी से हुई और उन्होंने साक्षात्कार के लिए मुझे अच्छे से GUIDE किया फिर 6 फरवरी को मेरा साक्षात्कार हुआ और जब 16 April को फाइनल रिजल्ट निकाला तो उसे लिस्ट में भगवान की कृपा से मेरे माता-पिता मेरी दादी मां मेरे गुरुजनों और मेरे सभी शुभचिंतकों की दुआओं से मेरा नाम उसे लिस्ट में 884 में नंबर पर था|
इसी के साथ अंत में मैं कहना चाहता हूं कि कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता बस बड़ा होना चाहिए तो उसे पाने के लिए हौसला बड़ा होना चाहिए जज्बा होना चाहिए जुनून होना चाहिए|
डर मुझे भी लगा था फासला देखकर पर मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर मंजिल खुद बे खुद मेरे करीब आती गई मेरा जुनून मेरा जज्बा मेरा हौसला देखकर
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